गीता लोगों को क्यों पढ़ना चाहिए इससे क्या लाभ होता है - DHARMS INFORMATION

Breaking

November 21, 2020

गीता लोगों को क्यों पढ़ना चाहिए इससे क्या लाभ होता है

Geeta


मनुष्य कितना भी पढ़ाई लिखाई कर ले पर भगवान श्री कृष्ण ने जो उपदेश देकर गए हैं  भागवत गीता में जो पाया गया है दूसरा कहीं नहीं मिलेगी ।

👇👇👇👇

 श्रीमद्भागवत गीता न केवल धर्म का उपदेश देती है, बल्कि जीवन जीने की  तारीका भी सिखाती है। महाभारत के युद्ध के पहले अर्जुन और श्रीकृष्ण के संवाद लोगों के लिए प्रेरणा स्त्रोत हैं। गीता के उपदेशों पर चलकर न केवल हम स्वयं का, बल्कि हमारे समाज का कल्याण भी कर सकते हैं। 👉 महाभारत के युद्ध में जब पांडवों और कौरवों की सेना आमने-सामने होती है तो अर्जुन अपने बुंधओं को देखकर विचलित हो जाते हैं। तब उनके सारथी बने श्रीकृष्ण उन्हें उपदेश दिए थे। ऐसे ही वर्तमान जीवन में उत्पन्न कठिनाईयों से लडऩे के लिए मनुष्य को गीता में बताए ज्ञान की तरह आचरण करना चाहिए। इससे वह उन्नति की ओर अग्रसर होगा।


👉 क्रोध पर नियंत्रण रखना चाहिए


गीता में लिखा है क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि व्यग्र होती है। जब बुद्धि व्यग्र होती है तब तर्क नष्ट हो जाते हैं। जब तर्क नष्ट होते हैें तो व्यक्ति का पतन शुरू हो जाता है।


 👉 नजरिया से बदलाव करना चाहिए


गीता में भगवान कहते हैं मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे उसके अनुरूप ही फल की प्राप्ति होती है। इसलिए सदकर्मों को महत्व देना चाहिए।

जो ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान और कर्म को एक रूप में देखता है, उसी का नजरिया सही है। इससे वह इच्छित फल की प्राप्ति कर सकता है।


👉 मन पर नियंत्रण आवश्यक हो जाती है


मन पर नियंत्रण करना बेहद आवश्यक है। जो व्यक्ति मन पर नियंत्रण नहीं कर पाते, उनका मन उनके लिए शत्रु का कार्य करता है।


 👉 आत्म मंथन करना चाहिए


व्यक्ति को आत्म मंथन करना चाहिए। आत्म ज्ञान की तलवार से व्यक्ति अपने अंदर के अज्ञान को काट सकता है। जिससे उत्कर्ष की ओर प्राप्त होता है।


 👉 सोच से अच्छाई निर्माण


मुनष्य जिस तरह की सोच रखता है, वैसे ही वह आचरण करता है। अपने अंदर के विश्वास को जगाकर मनुष्य सोच में परिवर्तन ला सकता है। जो उसके लिए काल्याणकारी होगा।


 👉   जैसा कर्म वैसा फल


गीता में भगवान कहते हैं मनुष्य जैसा कर्म करता है उसे उसके अनुरूप ही फल की प्राप्ति होती है। इसलिए सदकर्मों को महत्व देना चाहिए।


👉 कैसे सफलता प्राप्त करें


मनुष्य जो चाहे प्राप्त कर सकता है, यदि वह विश्वास के साथ इच्छित वस्तु पर लगातार चिंतन करे तो उसे सफलता प्राप्त होती है।


 👉 तनाव से मुक्ति पा सकोगे


प्रकृति के विपरीत कर्म करने से मनुष्य तनाव युक्त होता है। यही तनाव मनुष्य के विनाश का कारण बनता है। केवल धर्म और कर्म मार्ग पर ही तनाव से मुक्ति मिल सकती है।


 👉 ऐसे करें काम


बुद्धिमान व्यक्ति कार्य में निष्क्रियता और निष्क्रियता देखता है। यही उत्तम रूप से कार्य करने का साधन है।


चाहे कोई भी व्यक्ति हो यदि भागवत गीता एक बार पढ़ ले वह इंसान बदल जाते हैं और सही मार्ग पर चलने की कोशिश करते हैं ।