बंगाल में हिंदुओं की दुख भरी इतिहास

West bengal hindu


पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की दुख भरी इतिहास जानिए हमारे साथ मित्रों उससे पहले हमारे वेबसाइट में आपको स्वागतम ।🙏


पश्चिम बंगाल में वर्तमान राजनीति के कारण कुछ हिंदू लोग वह दिन भूल चुका है जिन लोगों ने अपने को हराया खुद को बेघर किया आज उन्हीं लोगों के साथ मिलकर देश को बर्बाद करने में लगे हुए हैं । और यह लोग सिर्फ अपने सत्ता पाने के लिए कर रहे हैं उन्हें आने वाले दिन के लिए कोई समझ नहीं है ।


 मित्रों मैं आज जो सच्चाई इतिहास बताने जा रहा हूं पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की एक दिन ऐसी परिस्थिति हुआ था जो कि मैं अपने मुंह से बयां नहीं कर सकता हूं । इसलिए मुझे जितना जानकारी मिली है मैं आपको साझा कर रहा हूं शायद इससे आपको समझ आ जाए । 


तो जानिए मित्रों पश्चिम बंगाल में हिंदुओं की दुख भरी इतिहास क्या है ?

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वर्तमान पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश उस समय पाकिस्तान स्थापित करने के लिए सीधी हमला किया था हिंदुओं पर।  यह 16 अगस्त 1946 को प्रारम्भ हुआ, जब मुस्लिम लीग तथा बंगाल के तत्कालीन मुख्यमंत्री सोहराबर्दी के उकसाने पर कलकत्ता तथा बंगाल और बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में मुसलमानों ने हिंदुओं पर भीषण प्रहार करने लगे जिससे 72 घंटों के भीतर बीस हजार से अधिक हिन्दू लोग मारे गए, तीस हजार से अधिक गंभीर रूप से घायल हुई थी और कई लाख हिन्दू परिवार बेघर हो गए। कई मासूम हिन्दू लड़कियों तथा महिलाओं का सामूहिक बलात्कार उनके परिजनों के सामने किया गया तथा उन्हें और उनके परिवार को काट कर मुस्लिम लीग ने अपनी मजहबी शक्ति का प्रदर्शन किया। ब्रिटिश और कांग्रेस दोनों को मुस्लिमों की ताकत दिखाने के लिए मुस्लिम लीग काउंसिल द्वारा 'डायरेक्ट एक्शन' की घोषणा की गई थी, जिसमे हिन्दुओं तथा सिक्खों का नरसंहार किया गया था। 


 क्यों हिंदुओं की नरसंहार किया ?

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1940 के दशक में भारत की संविधान सभा में मुस्लिम लीग और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस दो सबसे बड़ी राजनीतिक दल थे।  अंग्रेज राज से भारतीय नेतृत्व में सत्ता के हस्तांतरण की योजना बनाने के लिए 1946 के cabinet motion ने भारत के नए डोमिनियन और इसकी सरकार की रचना की प्रारंभिक योजना का प्रस्ताव दिया।

 हालांकि, जल्द ही ब्रिटिश राज को हिंदू बहुमत वाले भारत में विभाजित करने और मुस्लिम बहुमत वाले पाकिस्तान मुस्लिम लीग द्वारा प्रस्तावित एक वैकल्पिक योजना थी। कांग्रेस ने वैकल्पिक प्रस्ताव को खारिज कर दिया। मुस्लिम लीग ने 16 अगस्त को फिर से हड़ताल किया और उन लोगों ने कहा कि हमें मुस्लिम मातृभूमि चाहिए यानी इस्लाम देश हमें अलग से चाहिए ।


उस समय में बंगाल की स्थिति विशेष रूप से बहुत ही जटिल थी दरअसल मुसलमानों ने अधिकांश आबादी का प्रतिनिधित्व किया (56%, मुसलमान और 42% हिन्दू) सबसे ज्यादा मुसलमान पूर्व दिशा में रहा करते थे ।   


इस जनसांख्यिकीय संरचना और विशिष्ट घटनाओं के परिणामस्वरूप, यह प्रांत एकमात्र ऐसा था जिसमें एक मुस्लिम लीग सरकार 1935 में यूरोपियों के साथ गठबंधन में शुरू हुई जहां स्वायत्तता योजना के तहत सत्ता में थी, और कांग्रेस से मजबूत विरोध किया करते थे ।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और एक हिंदू राष्ट्रवादी पार्टी, हिंदू महासभा से भी।


नतीजतन जी ने देखा कलकत्ता के निवासियों मैं से, 64% हिंदुओं और 33% मुसलमान है तब दो अत्यधिक विरोधी संस्थाओं में बांटा गया था।. इसी के कारण भयंकर विरोध ने कलकत्ता में भारी दंगों की शुरुआत हुई जहां 72 घंटे के भीतर कलकत्ता में 20,000 से अधिक लोगों ने अपनी जान गंवा दी और 100,000 से अधिक निवासियों को बेघर छोड़ दिया गया। इस हिंसा ने नोआखली, बिहार, संयुक्त प्रांत और उत्तरी पश्चिमी फ्रंटियर प्रांत के आसपास के क्षेत्रो हिंदुओं अपने जान गवाया बेघर हुआ मां बेटी की बलात्कार हुआ यह घटना उस समय हुआ जो एक धार्मिक के कारण ।  

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यह सोचने वाली बात तो यह हैं कि इस्लाम धर्म के मुस्लिम लीग के पार्टी अपना धर्म के लिए देश बना लिया बांग्लादेश , और इधर मुसलमान पाकिस्तान देश भी बना लिया अपने धर्म के लिए ।  लेकिन हिंदुओं ने आज तक धर्म के लिए अपना हिंदू राष्ट्र बनाने के लिए कोई आवाज नहीं उठाया है । आज हिंदुओं की ऐसी परिस्थिति है पश्चिम बंगाल में नरक जैसी जिंदगी जी रहे हैं ।

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यदि धर्म के कारण कोई हिंदू प्रताड़ित हो रही है तो वर्तमान ममता दीदी के सरकार हैं वह भी मुंह मोड़ लेते हैं किसी भी प्रकार के हिंदुओं को सहायता नहीं करते हैं ।

पश्चिम बंगाल में वर्तमान परिस्थिति बहुत ही भयानक है हिंदुओं के लिए । लेकिन अभी भी कुछ हिंदू नेता है जो इसके विषय में ध्यान नहीं देते हैं क्योंकि सत्ता के लालच में गलत देखते हुए भी आंखें बंद कर देते हैं । हिंदुओं की दुख भरी इतिहास ऐसे नेता के लिए कोई मायने नहीं रखते हैं ।