दुर्गा पूजा संकल्प मंत्र कैसे जप करना चाहिए जानिए

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दुर्गा पूजा संकल्प मंत्र कैसे जप करें जानिए हमारे साथ मित्र नमस्कार हमारे वेबसाइट में आपका स्वागत है । 

जो मित्र लंबे समय से इंतजार कर रहे थे मां दुर्गा की संकल्प मंत्र साधना केलिए आज आप निश्चिंत रहिए इस मंत्र के जरिए आपकी मनोकामना पूरी हो जाएगी  । वैसे दुर्गा माता की कृपा पाने के लिए लोग तरह-तरह की उपाय करते हैं मगर आज तक जो भक्त मां दुर्गा की इस संकल्प मंत्र सही उच्चारण करके जाप किया है उसके लिए तो मां दुर्गा की असीम कृपा हमेशा बने रहे  । जो मंत्रों आपको पाने की इच्छा है यह मंत्र आप घर में प्रतिदिन जाप कर सकते हैं इसके लिए आपको अपने अंदर भक्ति और श्रद्धा होनी चाहिए  । ज्योतिष विज्ञान कहते हैं कि इस मंत्र में वह शक्ति है की माता बहुत जल्द प्रसन्न हो जाता हैं और तो और माता अपने भक्तों की सारी परेशानियों को दूर करते हैं । 


यह है माता की संकल्प मंत्र

ॐ विष्णु र्विष्णु र्विष्णु:, ॐ अद्य ब्रह्मणोऽह्नि द्वितीय परार्धे श्री श्वेतवाराहकल्पे वैवस्वतमन्वन्तरे,अष्टाविंशतितमे कलियुगे, कलिप्रथम चरणे जम्बूद्वीपे भरतखण्डे भारतवर्षे पुण्य (अपने नगर/गांव का नाम लें) क्षेत्रे बौद्धावतारे वीर विक्रमादित्यनृपते : , तमेऽब्दे प्रमादी  नाम संवत्सरे दक्षिणायने शरद  ऋतो महामंगल्यप्रदे मासानां मासोत्तमे आश्विन मासे शुक्ल पक्षे प्रतिपदायां तिथौ शनि वासरे  (गोत्र का नाम लें) गोत्रोत्पन्नोऽहं अमुकनामा (अपना नाम लें) सकलपापक्षयपूर्वकं सर्वारिष्ट शांतिनिमित्तं सर्वमंगलकामनया- श्रुतिस्मृत्योक्तफलप्राप्त्यर्थं मनेप्सित कार्य सिद्धयर्थं श्री दुर्गा पूजनं च अहं करिष्ये। तत्पूर्वागंत्वेन निर्विघ्नतापूर्वक कार्य सिद्धयर्थं  यथामिलितोपचारे गणपति पूजनं करिष्ये।

हिंदू धर्म में मान्यता यह है कि कोई भी पूजा करने से पहले भगवान गणेश की पूजा करना जरूरी है तभी सभी पूजा संपन्न होती हैं । इसलिए आप यदि दुर्गा माता की पूजा कर रहे हैं तो विघ्नहर्ता की पूजा आपको करना बहुत जरूरी है । उनकी मंत्र पाठ करके पूजा अवश्य करें तभी आपका पूजा संपन्न होगा  । 

भगवान गणेश जी की पूजा करने से दुर्गा माता जल्द ही प्रसन्न होती है क्योंकि दुर्गा माता का सबसे प्रिय पुत्र गणेश जी है । गणेश की पूजा करने से माता की कृपा बड़ी सरलता से प्राप्त होती है । आपके किसी भी काम में यदि विघ्नों उत्पन्न हो तो उसे दूर करने में सहायक बनते हैं भगवान गणेश जी । इसलिए आप भगवान गणेश जी की पूजा करके माता की कृपा प्राप्त करिए  ।

गजाननम्भूतगणादिसेवितं कपित्थ जम्बू फलचारुभक्षणम्। 

उमासुतं शोक विनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्।

आवाहन: हाथ में अक्षत लेकर

आगच्छ देव देवेश, गौरीपुत्र ​विनायक।

तवपूजा करोमद्य, अत्रतिष्ठ परमेश्वर॥

ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः इहागच्छ इह तिष्ठ कहकर अक्षत गणेश जी पर चढा़ दें। हाथ में फूल लेकर ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आसनं समर्पया​मि, अर्घा में जल लेकर बोलें ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः अर्घ्यं समर्पया​मि, आचमनीय-स्नानीयं ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः आचमनीयं समर्पया​मि वस्त्र लेकर ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः वस्त्रं समर्पया​मि, यज्ञोपवीत-ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः यज्ञोपवीतं समर्पया​मि, पुनराचमनीयम्, ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः रक्त चंदन लगाएं: इदम रक्त चंदनम् लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः , इसी प्रकार श्रीखंड चंदन बोलकर श्रीखंड चंदन लगाएं. इसके पश्चात सिन्दूर चढ़ाएं “इदं सिन्दूराभरणं लेपनम् ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः, दूर्वा और विल्बपत्र भी गणेश जी को चढ़ाएं.  

पूजन के बाद गणेश जी को प्रसाद अर्पित करें: ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः इदं नानाविधि नैवेद्यानि समर्पयामि, मिष्टान अर्पित करने के लिए मंत्र- शर्करा खण्ड खाद्या​नि द​धि क्षीर घृता​नि च,

आहारो भक्ष्य भोज्यं गृह्यतां गणनायक। प्रसाद अर्पित करने के बाद आचमन करायें. इदं आचमनीयं ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः . इसके बाद पान सुपारी चढ़ायें- ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः ताम्बूलं 

समर्पया ​मि अब फल लेकर गणपति पर चढ़ाएं ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः फलं समर्पया​मि, ॐ श्री ​सिद्धि ​विनायकाय नमः द्रव्य द​क्षिणां समर्पया​मि, अब ​विषम संख्या में दीपक जलाकर ​निराजन करें और भगवान की आरती गायें। हाथ में फूल लेकर गणेश जी को अ​र्पित करें, ​फिर तीन प्रद​क्षिणा करें। 

मुझे आशा है कि हमारे यह जानकारी आपको अच्छा लगा । प्रिय मित्रों यदि आपको हमारी यह जानकारी पसंद आया तो कमेंट अवश्य करें आने वाले समय में आपके लिए और भी अच्छा  जानकारी लेकर आएंगे । सभी धर्म एवं इतिहास से लेकर स्वस्थ लेकर आपको जानकारी देने के लिए दिन-रात धर्मस जानकारी मेहनत कर रहे हैं बस कृपया करके हमारे साथ बने रहिए आपका दिन शुभ हो मंगलमय हो  ।

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