कुरान में हिंदुओं के लिए क्या लिखा है सच्चाई क्या है जानिए विस्तार से

Religion



कुरान में हिंदुओं के लिए क्या लिखा है जानने के बाद आप खुद हैरान रह जाएंगे प्रिय मित्रों हमारे साथ बने रहने के लिए आपको स्वागतम  ।दुनिया में किस तरह जातिवादी में हिंसा हो रही है यह तो आप खुद देख रहे हैं । परंतु इसका असली कारण क्या है कुछ तो कारण है जिसके कारण हिंदू-मुस्लिम कहीं ना कहीं दंगाई दिखाई देते हैं । मैं आपको विस्तार से बताएंगे बस हमारे साथ बने रहिए ।


प्रिय मित्रों आप तो जानते हैं हम बचपन में जो भी पढ़ाई करते हैं उसे जल्दी भूलते तक नहीं हमेशा याद रखते हैं । बचपन में जो भी पढ़ाया जाता है उस पढ़ाई का ज्ञान बड़े होने पर काम पे लगता है । खैर धर्म सबका अपना-अपना आस्था से जुड़ा हुआ है कोई भी धर्म किसी भी धर्म के लिए बुरा नहीं कहते हैं और ना ही गलत कहते हैं । लेकिन कुरान मुसलमान के लिए पवित्र किताब है जहां अपने आस्था से जुड़ा हुआ है इस्लाम मजहब सिर्फ कुरान के अनुसार ही अपना धर्म निभाते हैं । दुनिया भर में 90% इस्लामिक बच्चे कुरान पढ़ते हैं कुरान पढ़ने से ज्ञान प्राप्त होती हैं और धर्म के मार्ग पर चलते हैं । यदि आप एक गैर मुस्लिम है तो कुरान में लिखी गई बातें आप को समझना चाहिए और यहां जो भी लेख के जरिए बताया गया है सभी जानकारी research करने के बाद ही बताया गया है ।



हिंदू सनातन धर्म के अधिकांश लोगों के बच्चे गीता का ज्ञान प्राप्त करते ही नहीं है स्कूल और कॉलेज के पढ़ाई में व्यस्त रहते हैं । पहले जमाने में हिंदुस्तान में गुरुकुल रहा करते थे ताकि धर्म ज्ञान प्राप्त हो सके लेकिन हिंदुस्तान में मुगलों की सम राज्य बनने के बाद सब बर्बाद हो गया है यानी गुरुकुल एक भी नहीं रहा मुगलों की द्वारा सब को नष्ट कर दिया गया है । और तो और स्कूल कॉलेज में हिंदू धार्मिक कथाएं किताब भी नहीं है जो आज के हिंदू सनातन धर्म के बच्चे हिंदू धर्म कथा का ज्ञान प्राप्त कर सकें । खैर जो भी हो लेकिन भारत में हर एक मुसलमान अपने बच्चों को कुरान पढ़ाते हैं जिसका असर संतान की बड़े होने पर दिखाई देता है । इस्लाम धर्म में यह भी कहा जाता है कि जो बच्चे कुरान नहीं पड़ेंगे उसे मुसलमान नहीं माना जाता है । लेकिन ऐसे हिंदू के अंदर बहुत कम लोग है जो अपने बच्चों को गीता पाठ कराते हैं  । 


 एक मुस्लिम बच्चे कुरान पढ़ने के बाद कितना ज्ञान प्राप्त करते हैं चलिए जानते हैं । प्रिय मित्रों कुरान के कुछ हिस्सों जानने के प्रयास करेंगे हमें क्या सिखाता है ।


कुरान के सूरह 9 में इस हिस्सा को हम लिया अब देखते हैं इसमें क्या ज्ञान प्राप्त हो सकता है ।


5 ﴿ अतः जब सम्मानित महीने बीत जायें, तो मिश्रणवादियों (मुश्रिकों) का वध करो, उन्हें जहाँ पाओ और उन्हें पकड़ो और घेरो और उनकी घात में रहो। फिर यदि वे तौबा कर लें और नमाज़ की स्थापना करें तथा ज़कात दें, तो उन्हें छोड़ दो। वास्तव में, अल्लाह अति क्षमाशील, दयावान् है।


इसमें यह लिखा है कि जिस पवित्र महीना में आप रोजा रखे हो उस समय अल्लाह की स्मरण करो और काफिरों को नजर में रखो । उस पवित्र महीने निकलने के बाद आप उन काफिरों को वध करो यदि सामने से लार नहीं पा रहे हो तो पीछे से वार करो जो तुम्हारे अल्लाह को ना मानने वाले हैं । अगर वह तुमसे जान की भीख मांग रहे हैं और फिर अल्लाह के स्मरण में आ जाए,  नमाज पढ़ने की तैयार हो जाए एवं खुद को मुसलमान बनने की तैयार हो जाए तो ऐसे व्यक्ति को क्षमा कर दो । 

यहां हिंदू ,सिख, ईसाई, बौद्ध, यहूदी ,जैन यह लोग तो अपने धर्म के ईश्वर को मानते हैं यह लोग तो अल्लाह को मानता नहीं है तो क्या यह लोग भी एक मुसलमान के सामने काफिर है ।

यदि अल्लाह सर्वोत्तम है सर्वश्रेष्ठ है तो दुनिया में दूसरे धर्म बने क्यों ? यदि दूसरे धर्म है भी तो क्या वे इंसान नहीं है आपके लिए शैतान है ? यदि अल्लाह सर्वश्रेष्ठ शक्तिमान है तो इंसान के भीतर इस प्रकार युद्ध करने के लिए प्रेरणा क्यों दे रहे हैं वह तो स्वयं आकर सब को समझा सकते हैं । प्रिय मित्रों इस बात पर आपका क्या राय है जरूर कमेंट करें  ।


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धर्म क्या है कैसे ज्ञान प्राप्त होती है

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﴾ 13 ﴿ तुम उन लोगों से युध्द क्यों नहीं करते, जिन्होंने अपने वचन भंग कर दिये तथा रसूल को निकालने का निश्चय किया और उन्होंने ही युध्द का आरंभ किया है? क्या तुम उनसे डरते हो? तो अल्लाह अधिक योग्य है कि तुम उससे डरो, यदि तुम ईमान वाले हो ।


 यहां ऐसा लिखा है कि उन काफिरों से तुम युद्ध करो जो काफिर तुम्हारे रसूल का अपमान करते हैं तुम्हारे अल्लाह को निकालने की बात करते हैं तुम किसी से डरो मत उनसे युद्ध करो और पराजित करो  ।


प्रिय मित्रों आप को क्या समझ में आ रहे हैं अगर कोई किसी को निकालने की बात करते हैं तो क्या यह संभव है।  और वह तो अल्लाह है जगत की हार है सर्वशक्तिमान है उसे निकालने के लिए अगर कोई बात भी कर लिए  तो क्या उसे निकाल सकते हैं । अल्लाह को कोई निकलने के लिए कह भी दिया तो इस बात के लिए इतना दुख जाहिर करना क्या आपको सही लगता है । इस बात के लिए क्या किसी को वध करना उचित लगता है आपका राई जरूर बताइए  ।


﴾ 23 ﴿ हे ईमान वालो! अपने बापों और भाईयों को अपना सहायक न बनाओ, यदि वे ईमान की अपेक्षा कुफ़्र से प्रेम करें और तुममें से जो उन्हें सहायक बनाएँगे, तो वही अत्याचारी होंगे।


यहां यह बताया गया है कि यदि आपका भाई, पिता , माता,  स्त्री, पुत्र कोई भी यदि दूसरे धर्म वालों को सहायता करते हैं या दोस्ती बनाते हैं तो यह आपके लिए हराम है । आपका वह भी शत्रु है जो दूसरे धर्म वालों से मित्र बनाते हैं । आपका उचित यही है कि आप उनको घर से बाहर निकाल दें । और उनसे रिश्ता नाता तोड़ दे जो अल्लाह का नहीं होता है वह किसी का नहीं है आप भी अपने बाप का पुत्र नेहीं । 


यह कैसा विचार है अपने ही पुत्र यदि किसी दूसरे धर्म वालों से मित्रता कर ले तो क्या मैं उनको भी अपने सूत्र मान लें।इस प्रकार से यदि बच्चों को पढ़ाया जाए तो क्या उनका मानसिकता दूसरे धर्म के लिए सम्मान रहेंगे आपका क्या राय है जरूर बताइए हमें ।


﴾ 38 ﴿ चोर, पुरुष और स्त्री दोनों के हाथ काट दो, उनके करतूत के बदले, जो अल्लाह की ओर से शिक्षाप्रद दण्ड है  और अल्लाह प्रभावशाली गुणी है।



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1. यहाँ पर चोरी के विषय में इस्लाम का धर्म विधान लिखा गया है कि यदि चौथाई दीनार अथवा उस के मूल्य के समान की चोरी की जाये, तो चोर का सीधी हाथ कलाई से काट दो। इस के लिये स्थान तथा समय नहीं दिया जाएगा।


शिक्षाप्रद दण्ड होने का अर्थ यह है कि दूसरे इस से शिक्षा ग्रहण करें, ताकि पूरा देश और समाज चोरी के अपराध से स्वच्छ और पवित्र रहे। तथा यह ऐतिहासिक सत्य है कि इस घोर दण्ड के कारण, इस्लाम के 1400 वर्षों में जिन्हें यह दण्ड दिया गया है, वह बहुत कम हैं। क्यों कि यह सज़ा ही ऐसी है कि जहाँ भी इस को लागू किया जायेगा, वहाँ चोर और डाकू बहुत कुछ सोच समझ कर ही आगे क़दम बढ़ायेंगे। जिस के फल स्वरूप पूरा समाज अम्न और चैन से जी सकता है। इस के विपरीत संसार के आधुनिक विधानों ने अपराधियों को सुधारने तथा उन्हें सभ्य बनाने का जो नियम बनाया है, उस ने अपराधियों में अपराध का साहस बढ़ा दिया है। अतः यह मानना पड़ेगा कि इस्लाम का ये दण्ड चोरी जैसे अपराध को रोकने में अब तक सब से सफल रही। और यह दण्ड मानवता के मान और उस के अधिकार के विपरीत नहीं है। क्यों कि जिस व्यक्ति ने अपना माल अपने खून-पसीना, परिश्रम तथा अपने हाथों की शक्ति से कमाया है, तो यदि कोई चोर आ कर उस को उचकना चाहे तो उस की सज़ा यही होनी चाहिये कि उस का हाथ ही काट दिया जाये, जिस से वह अन्य का माल हड़प करना चाह रहा था ।


गलत क्या है और सही क्या है एक मनुष्य के लिए निर्णय लेना कठिन हो जाता है तब जब उसे एक ही चीज बचपन में ही पढ़ाया जाता है । ईश्वर ने हर मनुष्य के भीतर सही और गलत समझने के लिए क्षमता दिया है और बुद्धि दिया है ।


यदि वास्तव में कुरान में यही सब लिखा रहेगा तो क्या एक संतान के दिमाग पर दूसरे धर्म के लोगों के प्रति प्रेम भावन रहेगा या नहीं यही साहब आपको भी विचार करना चाहिए । यहां धर्म के विषय में लिखी गई बातें किसी की भावनाओं को आहत करने की नहीं है बल्कि सच्चाई क्या है । क्या वास्तव में कुरान में इस प्रकार से लिखा गया है ? यदि इस प्रकार से लिखा गया है तो क्या एक बच्चे के दिमाग पर दूसरे मजहब के लोगों के प्रति प्रेमभावना रहेंगे या नफरत । अगर आपको अच्छी तरह से जानकारी हैं तो कमेंट अवश्य करें ।



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3 टिप्पणियाँ

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  2. ऐसा कुछ नहीं ये गलत है अगर घर्म ये सिखाता दुनिया बर्बाद हो चुकी होती 57 मुस्लिम देश एक हो जाते ओर मुगल हिन्दुओं को अपना वफादार सेनापति नहीं बनाते पेंटागन पर हमले के बाद अमेरिकी मिडिया ने धर्म को आतंकवाद से जोड़कर जो गंदा खेल खेला है सब उसका नतीजा है १४०० साल पहले जब लोग मुसलमान होना शुरु हुवे तो उन पर जुल्म हुवे फिर ऊपर से आयत उतरी जो तुम्हें मारे तुम उसे मारो ये आत्म रक्षा में उतरी थी / बाकी सब ड्रामे बाजी है गंदी राजनीति है

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  3. आप इश्वर कहो या अल्लाह हो हर धर्म का अलग अलग नही होता वो एक ही है अतः कोई गैर नही है अब काफिर शब्द की बात करे तो उसका अर्थ नास्तिक है जो सब धर्मोमे होते है और कुरान के जिन आयतो का उपर उल्लेख किया गया है उन मे जिने काफिर कहा है वे कोई और नही थे बल्की अरब वंशसे और पैगंबर के रिश्तेदार थे उन को सिर्फ इसलिये काफिर नही कहा गया की वो अल्लाह को नही मानते थे बल की इस लिये काफिर कहा है की वो सदाचारी नही थे बाद मे भी जब वो इस्लाम मे दाखिल हुये और कर्बला मे इन्ही की संतानोंने पैगंबर की संतानोंको मार डाला और उनके सात अमानवीय व्यवहार किया तब भी उन को काफिर ही कहा गया यानी काफिर का मतलब अमानवीय व्यवहार करने वाला है जो खुदा से भी नही डरता फिर वो कीसी भी धर्म का हो जो सदाचार नही करता और सदा दुराचार ही करता है वो काफिर है बाकी धर्मो की मान्यतासे इसका कोई समंध नही है
    इन आयतो मे मक्का के अमानवी व्यवहार करने वाले लोगोंसे यौध्द की बात कही है बाकी सारी दुनयासे युध्द करने को नही कहा है गीता मे भी कृष्ण ने अर्जून से बाररबार रिश्ते नातो का मोह छोड के युध्द करने को कहा है किंव की समाने दुर्योधन था उसी तऱ्हा यहा भी पैगंबर के सामाने भी दौर्योधन के प्रवृतीवाले ही लोग थे ये उस समय के इतिहास अंर कुराण की अन्य आयतो से पता चलता है तो किसी भी बात का बीना आभ्यास गलत मतवब नही निकालना चाहीये आज आतीरेकी मुस्लीम और अब हिंदु भी उन की देखादेखी गलत मतलब निकाल रहे है

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