vishwakarma puja is vidhi ke sath Puja Karen 2021


Vishwakarma puja


विश्वकर्मा पूजा किस विधी और नियमों के  करेंगे जानिए हमारे साथ मित्र नमस्कार हमारे वेबसाइट में आपका स्वागत है। 

शास्त्र के अनुसार भगवान विश्वकर्मा की विधि और नियमों के साथ पूजा संपन्न करने से उन्हें आसानी से सफलता प्राप्त होती हैं । भगवान विश्वकर्मा की कृपा दृष्टि बनाए रखने के लिए उन्हें प्रतिदिन लोहा संबंधित काम करने वाले व्यक्ति को पूजा करनी चाहिए । विश्वकर्मा की कृपा से बड़े से बड़े संकट को भी दूर किया जा सकता है । 



हिंदू धर्मग्रंथों में उल्लेख है कि भगवान विश्वकर्मा ही देवी देवताओं के भवन ,अस्त्र ,शस्त्र निर्माण किए थे । उस समय भगवान विश्वकर्मा एक इंजीनियर की तरह काम करते थे । भगवान विश्वकर्मा देवताओं को दिव्य अस्त्र प्रदान करते थे और फिर उसी के जरिए देवताओं ने राक्षस ,दानव, दैत्य इन सभी को वध करते थे । भगवान विश्वकर्मा के दिव्य अस्त्र में इतना शक्ति है कि कितने भी बुराई का महाशक्तिशाली क्यों ना हो उसे काट देने में सक्षम है । इसीलिए भगवान विश्वकर्मा के पूजा आराधना करने से कोई भी बुरे संकट क्यों ना आए क्षण भर में दूर हो जाते हैं ।



तो चलिए जानते हैं भगवान विश्वकर्मा की पूजा किस विधि और नियमों के साथ करेंगे ।


विश्वकर्मा जयंती प्रत्येक वर्ष मनाई जाती है, जब सूर्यदेव सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं. इस दिन पूजा करने के लिए सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहन लेना चाहिए. और फिर भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के लिए तैयार हो जाइए ।
 पूजा में हल्दी, अक्षत, फूल, पान, लौंग, सुपारी, मिठाई, फल, दीप, घी, और रक्षासूत्र शामिल करना चाहिए ।  पूजा घर में रखा लोहे का सामान और मशीनों को शामिल करें. पूजा करने वाली चीजों पर हल्दी और चावल लगाएं. इसके बाद पूजा में रखे कलश को हल्दी लगा कर रक्षासूत्र बांधे. घी से दीपक जलाए  इसके बाद पूजा शुरु करें ।

इस मंत्रों के साथ पूजा आरंभ करें ।
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ओम आधार शक्तपे नम:, ओम कूमयि नम:, ओम अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम:।

पूजा के समय रुद्राक्ष के माला सही से मंत्रों का उच्चारण करके जाप करने से आपको अच्छा फल मिलेगा ।

भगवान विश्वकर्मा जी की आरती भक्ति के साथ करें ।
हम सब उतारे आरती तुम्हारी हे विश्वकर्मा, हे विश्वकर्मा।

युग–युग से हम हैं तेरे पुजारी, हे विश्वकर्मा...।।

मूढ़ अज्ञानी नादान हम हैं, पूजा विधि से अनजान हम हैं।

भक्ति का चाहते वरदान हम हैं, हे विश्वकर्मा...।।

निर्बल हैं तुझसे बल मांगते, करुणा का प्यास से जल मांगते हैं।

श्रद्धा का प्रभु जी फल मांगते हैं, हे विश्वकर्मा...।।

चरणों से हमको लगाए ही रखना, छाया में अपने छुपाए ही रखना।

धर्म का योगी बनाए ही रखना, हे विश्वकर्मा...।।

सृष्टि में तेरा है राज बाबा, भक्तों की रखना तुम लाज बाबा।

धरना किसी का न मोहताज बाबा, हे विश्वकर्मा...।।

धन, वैभव, सुख–शान्ति देना, भय, जन–जंजाल से मुक्ति देना।

संकट से लड़ने की शक्ति देना, हे विश्वकर्मा...।।

तुम विश्वपालक, तुम विश्वकर्ता, तुम विश्वव्यापक, तुम कष्टहर्ता।

तुम ज्ञानदानी भण्डार भर्ता, हे विश्वकर्मा...।।

आरती के लिए कर्पूर या फिर घी के दीपक का प्रयोग करें। आरती करने से पूजा पूर्ण हो जाती है। पूजा में जो भी कमी रहती है, वह आरती से पूरी होती है, इसलिए पूजा के बाद आरती करना बहुत ही आवश्यकता है । आरती समाप्त होने के बाद आपका पूजा संपन्न हुआ उसके बाद आप प्रसाद वितरण करें ।

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