अग्नि प्रकट करने का मंत्र जानिए

 

Mantra



अग्नि प्रकट करने का जाने मंत्र ।  मित्रों नमस्कार हमारे वेबसाइट में आपका स्वागत है । 

हिंदू शास्त्र के अनुसार तंत्र मंत्र में इतनी शक्ति होती है कि अगर कोई व्यक्ति इसे संपूर्ण को अपने वश में करना चाहते हैं तो थोड़ी बहुत मेहनत तो करनी पड़ती है । 



जो मित्र लंबे दिनों से इंतजार कर रहे हैं यज्ञ में आग जलाने वाले मंत्र आज इंतजार उनके लिए खत्म होने वाले हैं । जिस प्रकार भगवान सूर्य देव अपने कर्म को नहीं भूलते हैं ठीक समय पर ही उदय होते हैं ठीक उसी प्रकार आपको भी इस मंत्रों का जाप करके सिद्ध करना होगा । शायद आप भली-भांति जानते हैं आग  भी एक देवता है जिसे हम लोग ब्रह्मा देव कहते हैं ब्रह्मा । 

अपने कर्म के जरिए भगवान ब्रह्मा देव को भी अपने सामने प्रकट कर सकते हैं इसमें कोई आश्चर्यजनक वाली बात नहीं है ।  बस अपने पर बुलंद रखकर ईश्वर प्रति विश्वास रखना है अपने कर्म को सही रखना है और विधि नियम को पालन करना है । 

जो मंत्र हम आपको देने जा रहे हैं इसे पूरा अगर कर सकते हैं तो ही कदम उठाइए नहीं तो आधा रास्ता पर अगर आप छोड़ देंगे तो आपके लिए बहुत हानिकारक हो सकता है ।सर्वप्रथम अपने मन में निश्चिंत कर ले कि हम पूरा कर पाएंगे या नहीं । 

इस मंत्र का जो मित्रों प्रयोग करना चाहते हैं तो चलिए मैं आपको वह मंत्रों बताने जा रहे हैं । 


मंत्र 


ॐ वं वहि तुभ्यं नमः 


मित्रों इस मंत्र का जाप अमावस्या की रात 12:00 बजे किसी पवित्र स्थान में बैठकर ब्रह्मा देव की तस्वीर सामने रखकर 11 लाख बार करनी चाहिए । इस मंत्र का 11 लाख बार जप करने से मंत्र और शुद्ध हो जाता है उसके बाद आप किसी भी यज्ञ  कुंड में अग्नि प्रकट कर सकते हैं।

इस मंत्रों का सिद्ध करने से पहले कुछ नियम है जो सभी को ध्यान रखना चाहिए । 


सर्वप्रथम आप जिस स्थान पर बैठ कर जप करेंगे उस जगह पर दूसरा कोई नहीं होना चाहिए और ना ही आपको कोई रोकना चाहिए मंत्र जाप करते वक्त अगर कोई आपको तो दे दो यह मंत्रों आपके लिए निष्फल हो जाएगी । जहां आप बैठेंगे उस जगह को सबसे पहले गंगाजल छिड़काव करके शुद्ध बना दे ।


धर्म शास्त्र के अनुसार कहा जाता है कि इस मंत्र का 11 लाख बार जाप करने से सिद्ध हो जाता है । ब्रह्म आप पर सदैव कृपा दृष्टि बनाए रखेंगे जब भी इस मंत्र का प्रयोग करेंगे तभी काम आएंगे । लेकिन किसी दूसरे के नुकसान करने के लिए अगर आप इस मंत्र का प्रयोग करेंगे तो उल्टा असर हो सकता है । भगवान ब्रह्मा देव कभी भी किसी के नुकसान करने के लिए इजाजत नहीं देते हैं ।


मंत्र करते समय सही उच्चारण करके ही करें और मंत्र करते समय दोनों हाथ जोड़कर ही करें इससे मंत्र का शक्ति और तेज हो जाता है ।  जब तक यह क्रिया समाप्त नहीं हो जाता तब तक अगरबत्ती जलाते रहना चाहिए । 

बड़े बड़े ज्ञानी मुनि ऋषि ने ऐसे ही प्रयास करते थे आप भी करें आप  सफल प्राप्त अवश्य कर सकते हैं इसमें कोई संदेह नहीं मित्रों जो कुछ भी यहां उल्लेख किया गया है ठीक इसी प्रकार आपको करना चाहिए ।

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