चंद्र ग्रहण 2025: जब आसमान में दिखेगा कुदरत का अद्भुत नज़ारा, जानिए पूरी जानकारी
आसमान की ओर देखना हमेशा से ही हम इंसानों को आकर्षित करता रहा है। तारे, ग्रह और हमारा प्यारा चंदा... ये सब मिलकर एक ऐसी दुनिया बनाते हैं जो रहस्य और रोमांच से भरी है। और जब इसी आसमान में कोई खगोलीय घटना होती है, तो हमारा उत्साह कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी ही एक रोमांचक घटना है 'चंद्र ग्रहण'।
साल 2025 खगोल प्रेमियों और आसमान में दिलचस्पी रखने वालों के लिए बेहद खास होने वाला है। इस साल हमें एक नहीं, बल्कि दो महत्वपूर्ण चंद्र ग्रहण देखने को मिलेंगे, जिनमें से एक तो पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसे "ब्लड मून" भी कहा जाता है। तो चलिए, जानते हैं कि 2025 में कब और कैसे हम इस अद्भुत नज़ारे के गवाह बन सकते हैं।
साल 2025 के दो प्रमुख चंद्र ग्रहण
आने वाले साल में दो मुख्य चंद्र ग्रहण लगेंगे। दोनों की अपनी-अपनी खासियत होगी।
1. पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse) - 14 मार्च, 2025
यह साल 2025 का सबसे बड़ा और सबसे शानदार चंद्र ग्रहण होगा। इस दिन चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया में आ जाएगा, जिससे उसका रंग गहरा लाल या तांबे जैसा हो जाएगा। इसी घटना को हम 'ब्लड मून' कहते हैं। यह नज़ारा बेहद खूबसूरत और यादगार होता है।
तारीख: 14 मार्च, 2025 (शुक्रवार)
प्रकार: पूर्ण चंद्र ग्रहण (Total Lunar Eclipse)
क्या भारत में दिखेगा?: नहीं, यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसका खूबसूरत नज़ारा उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप के कुछ हिस्से, और पश्चिमी अफ्रीका में देखने को मिलेगा। भारत में उस समय दिन होगा, इसलिए हम इसे नहीं देख पाएंगे।
2. आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse) - 7-8 सितंबर, 2025
यह साल का दूसरा चंद्र ग्रहण होगा, जो आंशिक होगा। इसमें चंद्रमा का केवल एक हिस्सा ही पृथ्वी की गहरी छाया से ढकेगा, जिससे ऐसा लगेगा जैसे किसी ने चांद का एक टुकड़ा काट लिया हो।
तारीख: 7-8 सितंबर, 2025 (रविवार/सोमवार की रात)
प्रकार: आंशिक चंद्र ग्रहण (Partial Lunar Eclipse)
क्या भारत में दिखेगा?: हाँ! यह चंद्र ग्रहण भारत के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देगा। इसके अलावा यह यूरोप, अफ्रीका, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में भी नज़र आएगा। तो भारत के लोग इस खगोलीय घटना का आनंद ले सकेंगे।
आखिर होता क्या है चंद्र ग्रहण?
इसे आसान भाषा में समझते हैं। हम सब जानते हैं कि चंद्रमा, पृथ्वी के चक्कर लगाता है और पृथ्वी, सूरज के। कभी-कभी ऐसा होता है कि तीनों- सूरज, पृथ्वी और चंद्रमा- एक सीधी रेखा में आ जाते हैं। जब पृथ्वी, सूरज और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तो पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने लगती है। इसी घटना को हम 'चंद्र ग्रहण' कहते हैं।
पूर्ण चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा पूरी तरह से पृथ्वी की छाया से ढक जाता है।
आंशिक चंद्र ग्रहण: जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा ही पृथ्वी की छाया में आता है।
वैज्ञानिक नजरिया और धार्मिक मान्यताएं
विज्ञान के लिए चंद्र ग्रहण एक सामान्य खगोलीय घटना है, जिसका अध्ययन हमें ब्रह्मांड को समझने में मदद करता है। यह पूरी तरह से सुरक्षित होता है और इसे नंगी आंखों से भी देखा जा सकता है।
वहीं, भारतीय संस्कृति और ज्योतिष में ग्रहण का विशेष महत्व है। ग्रहण के दौरान 'सूतक काल' माना जाता है, जिसमें कुछ कार्यों को करने की मनाही होती है। ऐसा माना जाता है कि सूतक काल वहीं मान्य होता है, जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूँकि सितंबर 2025 का ग्रहण भारत में दिखेगा, तो इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं और सूतक काल भी प्रभावी होंगे।
कैसे देखें यह खगोलीय नज़ारा?
अगर आप सितंबर 2025 के आंशिक चंद्र ग्रहण को देखने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ बातें ध्यान में रख सकते हैं:
सुरक्षा: सूर्य ग्रहण के विपरीत, चंद्र ग्रहण को देखने के लिए किसी खास चश्मे या उपकरण की ज़रूरत नहीं होती। यह पूरी तरह सुरक्षित है।
साफ आसमान: किसी ऐसी जगह का चुनाव करें जहां आसमान साफ हो और शहर की रोशनी कम से कम हो।
दूरबीन का प्रयोग: अगर आपके पास दूरबीन (Binoculars) या छोटा टेलीस्कोप है, तो आप चंद्रमा की सतह पर पड़ती पृथ्वी की छाया को और भी स्पष्ट रूप से देख पाएंगे।
निष्कर्ष
साल 2025 हमें ब्रह्मांड के एक खूबसूरत नाटक का गवाह बनने का मौका दे रहा है। भले ही मार्च का 'ब्लड मून' भारत से न दिखे, लेकिन सितंबर का आंशिक चंद्र ग्रहण हमें निराश नहीं करेगा। तो अपनी डायरी में इन तारीखों को नोट कर लीजिए और तैयार हो जाइए, आसमान के इस अद्भुत spectacle को अपनी आंखों में कैद करने के लिए